कोरोना को नियंत्रित करने के उद्देश्य से, दिल्ली सरकार ने शहर में पॉज़िटिव कोरोनावायरस मामलों की पहचान करने के लिए ‘ऑपरेशन शील्ड’ शुरू किया है। यह ऑपरेशन कम्यूनिटी ट्रांसमिशन के जोखिम को कम करने के लिए लागू किया गया है ।
दिल्ली सरकार ने अपने सभी कंटेन्मेंट ज़ोंज़ में ऑपरेशन शील्ड का कार्यान्वयन शुरू कर दिया है। किसी भी विशेष क्षेत्र को कंटेन्मेंट ज़ोन तब बनाया जाता है जब वहाँ तीन या तीन से अधिक कोरोना पॉज़िटिव मामले पाए जाते हैं।
एक कंटेन्मेंट ज़ोन के अंदर क्या होता है?
दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए उन क्षेत्रों में निवारक उपाय किए जाते हैं जिनमें कोरोना पॉज़िटिव मामलों की अधिकतम संख्या होती है। इन उपायों में उस क्षेत्र को सील करना, सेनिटाइज़ेशन, परीक्षण और टेस्टिंग, उन क्षेत्रों में लोगों की होम क्वॉरन्टीन और मूलभूत सुविधाओं को घर पे पहुँचाने की व्यवस्था शामिल है ।
स्वास्थ्य अधिकारियों की विशेष टीम ने नियंत्रण क्षेत्र में रहने वाले सभी लोगों के सैंपल एकत्र करने के लिए घर-घर जाकर दौरा करते हैं।
नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों पॉज़िटिव कोरोना मामलों की कॉंट्रैक्ट ट्रेसिंग करने के साथ साथ यह सुनिश्चित करते हैं कि लोग होम क्वॉरन्टीन का पालन करें।
नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक और आशा कार्यकर्ताओं और अन्य वॉलंटीर्ज़ कंटेन्मेंट ज़ोंज़ में रहने वाले लोगों के लिए आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं।
ऑपरेशन शील्ड को कैसे सफलता मिली है?
राज्य भर में कई कंटेन्मेंट ज़ोंज़ अब दिल्ली सरकार की सख्त नीतियों के परिणामस्वरूप कम हो गए हैं। यदि पिछले चार हफ्तों से कंटेन्मेंट ज़ोंज़ के अंदर कोई पॉज़िटिव मामले सामने नहीं आते हैं, तो क्षेत्र को डी-कंटेन कर दिया जाता है । वर्तमान में, 17 ज़ोंज़ को दिल्ली सरकार द्वारा डी-कंटेन किया गया है।