दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री माननीय सतेंन्द्र जैन का बयान


नई दिल्ली-ः दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली में 36824 केस हैं। जिसमें 2137 केस जुडे थे और 1214 लोगों की मौत हो चुकी है। दिल्ली में एक्टिव 22212 केस है। दिल्ली के अस्पतालों में करीब 5700 लोग भर्ती हैं। इसमें 345 लोग आईसीयू में भर्ती हैं। दिल्ली में बढ़ रहे केस के सापेक्ष सरकार की चल रही तैयारियों के संबंध में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि विशेषज्ञों ने बेड आदि के इंतजाम करने का आंकलन करके दिया है, उसी के मुताबिक हम चल रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि 30 तक जितने बेड की जरूरत पड़ने की संभावना है, उसकी तैयारियां हम 20 जून तक पूरी कर लेंगे और 15 जुलाई तक जितने बेड की जरूरत पड़ेगी, उसकी हम 30 जून तक तैयारी कर लेंगे। स्टेडियम, बैंक्वेट हाॅल, कम्युनिटी हाॅल और स्कूलों के अंदर भी बेड बनाने की व्यवस्था देखी जा रही है।

स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने कहा कि अभी सभी अस्पतालों से इलाज करने का रेट मंगाया गया है। ज्यादातर अस्पतालों के रेट आ चुके हैं। कोरोना का केस दिल्ली सहित पूरे देश में हैं। हर जगह पर कोरोना के केस हैं। हमें लगता है कि यह मान कर नहीं चलना चाहिए कि सिर्फ इसी क्षेत्र में ज्यादा केस है। कुछ समय बाद दूसरे का भी नंबर आ सकता है। एक समय कहा जा रहा था कि अमेरिका, इटली और यूके में ज्यादा केस हैं। भारत में बिल्कुल केस नहीं है। तब भारत में कुल 100 केस थे। इसके बाद भारत में भी केस बढ़े। भारत में भी अलग-अलग जगह और शहरों का अलग-अलग पैरामीटर है। कोई एक महीना पीछे है, तो कोई एक महीना आगे है। मसलन, मुम्बई शहर की बात करें, तो दिल्ली अभी मुम्बई में 10 से 12 दिन पीछे चल रही है। इसी तरह, संभव है कि दिल्ली के पीछे कोई दूसरा राज्य 15 दिन या एक महीना पीछे हो। यह बीमारी इतिहास में 100 साल के बाद फिर से आई है। उस समय इसे स्पैनिस फ्लू कहा गया था। अब यह दुबारा से आई है और बहुत तेजी से फैल रही है। कोई संक्रामक (फैलने वाली बीमारी) बीमारी इतने ज्यादा तेजी से फैलने वाली नहीं आई है।

स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली में अभी भी केस को दोगुना होने की दर 13 से 14 दिन है। मसलन, आज की तारीख में 37 हजार केस है। यह 37 हजार केस होने में तीन से चार महीने लगे, लेकिन आने वाले 13 से 14 दिन में 37 हजार से केस दोगुने हो सकते हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि रिकवरी रेट कम नहीं है। क्योंकि मरीज को पूरी तरह से ठीक होने में 14-15 दिन लगते हैं। अभी नए केस अधिक आए हैं। अभी भी 100 मरीजों में 97 से 98 लोग ठीक हो रहे हैं। एमसीडी का कहना है कि उनके अस्पतालों में जनवरी फरवरी, मार्च और अप्रैल, हर महीने पिछले साल के मुकाबले मौतें कम हुई हैं और दूसरी तरफ वो सर्टिफिकेट दिखा रहे हैं। एमसीडी मीडिया में सर्टिफिकेट दिखाने की बजाय दिल्ली सरकार को देती तो ज्यादा अच्छा रहता।

उत्तर प्रदेश और दिल्ली में कोरोना की जांच को लेकर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एक ग्राफ सोशल मीडिया पर शेयर किया है। जिसमें उत्तर प्रदेश में प्रति बिलियम लोगों पर 1740 और दिल्ली में 13446 टेस्ट हो रहे हैं। इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने कहा कि उत्तर प्रदेश और दिल्ली की जांच में ज्यादा नहीं, सिर्फ 10 गुना का फर्क है। उत्तर प्रदेश में दिल्ली की अपेक्षा 10 गुना कम जांच की जा रही है, इसलिए वहां पर 10 गुना कम केस सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई पर कोई भी टिप्पणी करना ठीक नहीं है। एलएनजेपी अस्पताल के संबंध में कहा कि कुछ प्रोत्साहित लोग ऐसा कर रहे हैं। जैसा कि दो दिन पहले की एक वीडियो वायरल हुई थी, वह एक संविदा कर्मचारी ने बनाई थी। उसे निलंबित भी कर दिया गया है। वह वीडियो जानबूझ कर बनाई गई थी।

स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने कहा कि देश के सभी राज्यों में डेथ आॅडिट कमेटी बनी है। राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात समेत सभी राज्यों में बनी है। कई राज्यों में यह कमेटी जिला स्तर पर भी बनाई गई है। इस कमेटी का काम मौतों की संख्या को कम या ज्यादा करने का नहीं है। जो भी रिपोर्ट आती है, कमेटी उसी रात 10 से 11 बजे तक जारी कर देती है। सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीज के वार्ड के अंदर नर्स, डाॅक्टर और वार्ड ब्वाॅयज की तैनाती होती है। उनको अपने-अपने वार्ड का ध्यान रखना होता है। एलएनजेपी अस्पताल में मरीजों को दिन में चार बार भोजन दिया जाता है। इसके अलावा फल और पानी का भी इंतजाम किया जाता है। इस तरह मरीजों के खाने और रहने सहित सभी बातों का ख्याल रखा जाता है।

स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने कहा कि हम आईसीएमआरसी की गाइड लाइन के अनुसार जांच की संख्या बढ़ाते हैं। हम आईसीएमआर की गाइड लाइन का उल्लंघन नहीं कर सकते हैं। आईसीएमआरसी ने जो भी शर्तें लगा रखी हैं, उन्हीं के आधार पर पूरे देश के अंदर जांच हो सकती है। उस गाइड लाइन को मानने के लिए सभी बाध्य है। उस गाइड लाइन में स्पष्ट कहा गया है कि किसकी जांच हो सकती है और किसी नहीं हो सकती है। आईसीएमआरसी शर्तों को हटा दे, तो जो भी लोग चाहेंगे, वह अपनी जांच करा सकते हैं। लेकिन ऐसा करने से एक समस्या यह आएगी कि बीमार लोग कम जांच कराएंगे और स्वस्थ्य लोग अधिक जांच कराएंगे। ऐसे में बीमार व्यक्ति का नंबर महीने भर में आएगा।